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ब्यावर शहर का मुख्य प्रवेश द्वार "चांग गेट" है, जिसे ब्रिटिश काल के दौरान कर्नल चार्ल्स जॉर्ज डिक्सन द्वारा स्थापित किया गया था। यह ब्यावर की ऐतिहासिक पहचान और व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्रीय गढ़ है। इसके आस-पास के रंग-बिरंगे बाजार और चहल-पहल ब्यावर की समृद्ध विरासत का सजीव उदाहरण हैं।
तेजा दशमी के अवसर पर ब्यावर में आयोजित होने वाला लोक देवता वीर तेजाजी महाराज का मेला राजस्थान भर में प्रसिद्ध है। इस विशाल सांस्कृतिक मेले में हजारों श्रद्धालु व सैलानी भाग लेते हैं। मेले का मुख्य आकर्षण पारंपरिक लोक नृत्य, संगीतमय प्रस्तुतियां और रंग-बिरंगे ग्रामीण हाट-बाजार होते हैं, जो ब्यावर की सांस्कृतिक धरोहर को संजोए हुए हैं।
ब्यावर के पास स्थित सेंदड़ा गांव अपने विशाल ग्रेनाइट पत्थरों और प्राकृतिक रूप से नक्काशीदार चट्टानों के लिए जाना जाता है। हवा और पानी के बहाव से हजारों वर्षों में बनी इन चट्टानों की आकृतियां विभिन्न जानवरों और पक्षियों (जैसे मेढक, सांप, बाज) से मिलती-जुलती हैं। प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफर्स के लिए यह एक बेजोड़ पर्यटन स्थल है।
ब्यावर शहर के बीचों-बीच स्थित नेहरू पार्क स्थानीय लोगों के मनोरंजन और सैर के लिए सबसे लोकप्रिय जगह है। पार्क में हरी-भरी घास, सुंदर क्यारियां, बच्चों के लिए टॉय ट्रेन, बोटिंग क्लब और शाम के समय चलने वाला संगीतमय फव्वारा (Musical Fountain) पर्यटकों व बच्चों को आकर्षित करता है।
पहाड़ियों के बीच शांत वातावरण में स्थित दूधेश्वर महादेव मंदिर ब्यावर के पास एक प्राचीन और पवित्र धार्मिक स्थल है। यह मंदिर अरावली पर्वतमाला के बीच प्राकृतिक सुंदरता और शांति से घिरा हुआ है, जहां महाशिवरात्रि और सावन के महीने में भगवान शिव के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
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